[07/11, 16:55] Suchna Adikhari Kumbh: क

मैकेनिकल कार्य, सिविल कार्य और कंक्रीट पियर्स की मरम्मत तकनीकी रूप से अलग-अलग कार्य

सिंचाई विभाग ने सोशल मीडिया पर प्रसारित आरोपों का किया खंडन, कार्यों की वस्तुस्थिति की स्पष्ट

हरिद्वार, 07 नवंबर

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के अंतर्गत तीन अस्थायी पुलों के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग शासनादेशों के माध्यम से एक ही कार्य के लिए बार-बार धनराशि स्वीकृत किए जाने संबंधी प्रसारित समाचार को कार्यदायी संस्था अवस्थापना खंड सिंचाई विभाग रुड़की के अधिशासी अभियंता श्री मनोज कुमार ने भ्रामक एवं तथ्यों से परे बताते हुए स्पष्ट किया है कि तीनों शासनादेश अलग-अलग तकनीकी प्रकृति के कार्यों के लिए जारी किए गए हैं। इनमें किसी भी कार्य की पुनरावृत्ति नहीं की गई है।

अधिशासी अभियंता ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश के अंतर्गत जारी स्वीकृति के क्रम में तीन अस्थायी पुलों से संबंधित मैकेनिकल प्रकृति के कार्य कराए जा रहे हैं। इसमें पुलों को स्टोर से कार्यस्थल तक लाने, स्थापित करने, चेकर्ड प्लेट एवं राफ्टर बदलने, पुलों की मरम्मत और पेंटिंग के साथ ही कुंभ मेला समाप्त होने के बाद पुलों को डिस्मेंटल कर पुनः स्टोर में सुरक्षित रखने का कार्य शामिल है। इसके अतिरिक्त पुलों की पांच वर्ष तक सुरक्षा का प्रावधान भी इसी कार्य में सम्मिलित है।

उन्होंने बताया कि 27 मार्च 2026 को जारी शासनादेश के अंतर्गत रैंप निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। यह मैकेनिकल कार्य से अलग सिविल प्रकृति का कार्य है। इसके अंतर्गत एस्केप चैनल के डाउनस्ट्रीम की ओर रैंप बनाए जाते हैं। तकनीकी एवं कार्यगत आवश्यकताओं के अनुसार इनका निर्माण गंगा नहर बंदी के बाद तथा कुंभ मेला प्रारंभ होने से पहले किया जाना होता है। इसलिए रैंप निर्माण को पुलों की मैकेनिकल मरम्मत एवं स्थापना के कार्य से अलग रखा गया है।

इन तीन अस्थाई फ्लू की स्थापना के लिए पहले से बने 11 कंक्रीट पियर्स की मरम्मत का कार्य हेतु 33 लाख 06 हजार रुपये की धनराशि
स्वीकृत की गई है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि पिछले गंगा नहर क्लोजर के दौरान अस्थायी पुलों की स्थापना करते समय पूर्व निर्मित इन पियर्स में मरम्मत की आवश्यकता सामने आई थी। इसके बाद तकनीकी आवश्यकता के आधार पर इस कार्य की नियमानुसार स्वीकृति प्राप्त की गई।

अधिशासी अभियंता श्री मनोज कुमार ने स्पष्ट किया कि तीनों कार्यों की प्रकृति, तकनीकी आवश्यकता और कार्य निष्पादन की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। इन्हें एक ही कार्य के अलग-अलग एस्टीमेट अथवा एक कार्य की पुनरावृत्ति के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 के अंतर्गत सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप संपादित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर शासनादेशों को अलग-अलग कार्यों के तकनीकी संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत करने के कारण अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तीनों शासनादेश अलग-अलग कार्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप जारी किए गए हैं।
[07/11, 17:08] Suchna Adikhari Kumbh: कुंभ-2027: गंगा नहर क्लोजर के दौरान घाट निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती सफलतापूर्वक पार, महत्वपूर्ण कार्य तय समयसीमा में पूरे

मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका के निर्देश पर युद्धस्तर पर दिन-रात चला काम, गुणवत्ता और समयबद्धता के लिए होती रही निरंतर निगरानी

लगभग सवा तीन किलोमीटर लंबाई में 10 नए घाटों का निर्माण, 56 पुराने घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी पूरी; शेष कार्य 30 नवंबर तक होंगे संपन्न

हरिद्वार, 07 नवंबर 2026

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के अंतर्गत हरिद्वार में घाटों के निर्माण एवं मरम्मत को लेकर गंगा नहर क्लोजर की अवधि में किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। सामान्य जलप्रवाह शुरू होने के बाद जिन कार्यों को करना संभव नहीं था, उन्हें क्लोजर अवधि में युद्धस्तर पर दिन-रात काम कराकर निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही कुंभ मेला-2027 के लिए घाटों के निर्माण की सबसे बड़ी तकनीकी एवं समयबद्धता संबंधी चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया है।

मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका के निर्देश पर क्लोजर अवधि का प्रभावी उपयोग करते हुए घाटों के जलमग्न रहने वाले हिस्सों तथा नदी तल में जलस्तर से नीचे किए जाने वाले निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इन कार्यों को निर्धारित समय में पूरा कराने के लिए दिन-रात काम कराया गया। साथ ही निर्माण कार्यों की समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी की व्यवस्था की गई थी। इसी का परिणाम रहा कि गंगा नहर क्लोजर की अवधि समाप्त होने से पहले ही सभी आवश्यक एवं महत्वपूर्ण कार्य पूरे कर लिए गए।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता श्री अनुभव नौटियाल ने बताया कि कुंभ मेला-2027 में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हरिद्वार में लगभग सवा तीन किलोमीटर लंबाई में 10 नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इन सभी घाटों का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्यों को भी आगामी 30 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नए घाटों के निर्माण के साथ ही अपर गंगा कैनाल पर पूर्व में निर्मित 34 घाटों तथा एस्केप चैनल पर स्थित 22 पुराने घाटों के जलमग्न रहने वाले हिस्सों की मरम्मत का कार्य भी क्लोजर अवधि के दौरान पूरा कर लिया गया है। इन सभी कार्यों को सामान्य जलप्रवाह शुरू होने से पहले पूरा करना आवश्यक था।

श्री नौटियाल ने बताया कि गंगा नहर बंदी की अवधि आज रात समाप्त हो रही है। क्लोजर के दौरान किए जाने वाले सभी आवश्यक निर्माण एवं मरम्मत कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे कर लिए गए हैं। अब सामान्य जलप्रवाह शुरू होने के बाद घाटों के जलस्तर से ऊपर के शेष निर्माण कार्यों तथा सौन्दर्यीकरण एवं फिनिशिंग के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शेष कार्यों को भी निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाएगा, ताकि कुंभ मेला-2027 के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुविधाजनक घाट उपलब्ध कराए जा सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *